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| Last Updated::23/06/2015

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एफआरआई के वैज्ञानिकों ने तैयार किए कार्बन का ज्यादा शोषण करने वाले पौधे

 

 

पर्यावरण के 'पहरेदार', यहां किए जा रहे तैयार

 

एफआरआई के वैज्ञानिकों ने तैयार किए कार्बन का ज्यादा शोषण करने वाले पौधे

 

वन अनुसंधान संस्थान (एफ.आर.आई.) के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण पर लगातार बढ़ते प्रदूषण के दबाव को कुछ कम करने का तरीका खोज निकाला है। यहां के वैज्ञानिकों ने ऐसे खास पौधे तैयार किए हैं, जो कार्बन उत्सर्जन का ज्यादा शोषण करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण में काफी हद तक सहायता मिलेगी।

तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन ने पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा पैदा किया है। ऐसे में एफ.आर.आई. के वैज्ञानिकों ने इस समस्या से पार पाने के लिए इसी दिशा में शोध किए। कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिक पर्यावरण के ऐसे ‘पहरेदार’ तैयार करने में कामयाब हुए जो कार्बन का ज्यादा शोषण करते हैं। इसमें शीशम, यूकेलिप्टिस, मीलिया और बांस की कई ऐसी प्रजातियां तैयार कर ली गई हैं जो आम के पौधे के मुकाबले कई गुना ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं और उतनी ही तेजी से कार्बन का शोषण करती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे एक ओर जहां पौधे की ग्रोथ की दर में बढ़ोतरी हुई हैं, वहीं पर्यावरण संरक्षण में भी नई शुरूआत हुई हैं।

 

जितनी तेज बढ़त उतना कार्बन शोषण

 

वैज्ञानिकों के मुताबिक पौधों की जो ब्रीड उन्होंने तैयार की है, उसमें कार्बन का सामान्य पौधों के मुकाबले ज्यादा शोषण होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जितनी तेजी से यह पौधे बढ़ते हैं, उतनी ही ज्यादा मात्रा में कार्बन का शोषण करते हैं। सामान्य पौधों की वृद्धि दर इनसे कहीं कम होती है। बताया कि पौधे की जितनी ग्रोथ होगी, वह उतना ही अधिक कार्बन का शोषण करेगा।

 

कार्बन स्टॉक बढ़ाने में उत्तराखंड दूसरे नंबर पर

 

फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया (एफएसआई) की ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2013’ के मुताबिक कार्बन स्टॉक बढ़ाने के मामले में उत्तराखंड का भी नाम देशभर में आता है। रिपोर्ट के मुताबिक 527.45 मिलियन क्यूबिक मीटर स्टॉक बढ़ोत्तरी के साथ अरुणाचल प्रदेश पहले, 492.42 मिलियन क्यूबिक मीटर के साथ उत्तराखंड दूसरे, 423.42 मिलियन क्यूबिक मीटर के साथ छत्तीसगढ़ तीसरे, 384.17 मिलियन क्यूबिक मीटर के साथ कर्नाटक चौथे और 377.25 मिलियन क्यूबिक मीटर के साथ जम्मू एवं कश्मीर पांचवें स्थान पर है।

 

पेड़ कटने पर छोड़ देता है कार्बन स्टॉक

 

वृक्षों से जुड़ा हर हिस्सा कार्बन स्टॉक को अपने भीतर संरक्षित करता है। पेड़ कटने की सूरत में वृक्ष इस कार्बन स्टॉक को छोड़ता है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होते हैं।

 

कार्बन स्टाक का फायदा

 

हम जो कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ते हैं, उसका स्टॉक पेड़ अपने पास रखते हैं। अगर इनसे यह कार्बन स्टॉक हट जाए तो ग्लोबल वार्मिंग शुरू हो जाएगी और देश-दुनिया में इसके बेहद बुरे प्रभाव नजर आएंगे। एफएसआई की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत के जंगलों में वर्ष 2004 की तुलना में वर्ष 2013 तक 278 मिलियन टन कार्बन स्टॉक एकत्र हुआ है।

 

 

अमर उजाला (देहरादून), 5 June. 2015