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| Last Updated:: 16/10/2020

Medicinal Plants

बरगद और आंवला
 
क्र. सं.
हिन्दी नाम
वैज्ञानिक नाम
औसत लम्बाई
पौधे का वर्णन
औषधि विवरण एवं विशेषताएं
1.
बरगद
फाइकस वैनगैलेंसिस
25-30 फीट
बरगद के पेड़ के सभी भागों (जड़, तना, पत्तियां, फल और छाल) को औषधीय उपयोग में लाया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट (सूजन घटाने वाला और एंटी- माइक्रोबियल (बैक्टीरिया को नष्ट करने वाला) प्रभाव कई तरह के औषधीय लाभ पहुंचाता हैं।
 
1. इसकी पत्तियों में कुछ खास तत्व जैसे हेक्सेन, ब्यूटेनॉल क्लोरोफॉर्म और पानी मौजूद होता है। ये सभी संयुक्त रूप से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
2. इस पेड़ की जड़ में हाइपोग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर को कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है इसलिए डायबिटीज की समस्या से राहत दिलाने के लिए सहायक है। बरगद की जड़ के फायदे में डिप्रेशन से छुटकारा भी शामिल है।
3. बरगद के पेड़ से निकलने वाले दूध में रेजिन, एल्ब्यूमिन, सेरिन, शुगर और मैलिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते है। ये संयुक्त रूप से डायरिया और बवासीर की समस्या में लाभदायक माने जाते हैं।
4. बरगद के पत्तो का उपयोग यूरिनरी समस्या को दूर करने में किया जाता है।
5. इस पेड़ के जलीय अर्क का सेवन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियत्रित कर सकता हैं। बरगद में मौजूद एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव खुजली से राहत दिलाने में सहायक साबित हो सकते हैं।
6. बरगद में एंटी-माइक्रोबियल गुण पाया जाता है, जो बैक्टीरियल इफेक्शन को दूर करने में मदद करता है।
2.
आंवला
फिल्लोन्थस इम्बेलिका
20-25 फीट
आंवला को आयुर्वेद में अमृतफल या धात्रीफल कहा गया है। शुरू से ही आंवला का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है। पेड़-पौधें से जो औषधि बनती हैं उसको काष्ठौषधि कहते है और धातु-खनिज से जो औषधि बनती है उनको रसौषधि कहते है। इन दोनों तरह की औषधि में आंवला का इस्तेमाल किया जाता हैं। पांच रस आंवला में विटामिन सी, विटामिन एबी कॉम्प्लेक्स, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और डाययूरेटिक एसिड पाए जाते हैं।
1. आंवला शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है और साथ ही आंवला कई बीमारियों को जड़ से भी खत्म करता हैं।
2. डायबिटीज में आंवला बेहद फायदेमंद हैं। इसमें क्रोमियम तत्व पाए जाते हैं, जो इंसुलिन हार्मोस को मजबूत कर खून में शुगर लेवल को नियंत्रित करते हैं।
3. आंवला दिल के लिए सेहतमंद है। इसमें मौजूद क्रोमियम बीटा ब्लॉकर के प्रभाव को कम करता है। यह खराब कोलस्ट्रॉल को खत्म कर अच्छे कोलस्ट्रॉल को बनाने में मदद करता है।
4. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मददगार हैं। आंवला को किसी न किसी रूप में अपने भोजन में शामिल करना चाहिए।
5. आंवला में बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन से लड़ने की ताकत होती हैं।
6. आंवला शरीर में मौजूद टॉक्सिन यानी कि जहरीले पदार्थों को बाहर निकाल देता हैं।
7. आंवला खाने से सर्दी-जुकाम, अल्सर और पेट के इंफेक्शन से मुक्ति मिलती हैं।
8. आंवला खाने से हडिड्यों को ताकत मिलती हैं। इससे ऑस्ट्रोपोरोसिस, अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द से आराम मिलता हैं।
9. आंवला का रस आंखों के लिए  गुणकारी  हैं।
                                स्त्रोतः दैनिक जागरण(देहरादून) , 02 जुलाई 2020
 
नीम और पीपल
क्र. सं.
हिन्दी नाम
वैज्ञानिक नाम
औसत लम्बाई
पौधे का वर्णन
औषधि विवरण एवं विशेषताएं
3.
नीम
एजेडिरेक्टा इंडिका
15-20 मीटर
नीम को संस्कृत में अरिष्ट कहा जाता है। मतलब श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी न खत्म होने वाला। सर्व रोग निवारिणी कहीं जाने वाली नीम के बारे में माना जाता है कि इसके फल, बीच, तेल, पत्ते और जड़ तक में बीमारियों से लड़ने के गुण हैं।
1. नीम के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह संक्रमण जलन और त्वचा की किसी भी तरह की समस्याओं पर अच्छा काम करता हैं।
2. यह बैक्टीरिया को नष्ट करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है और तेजी से चिकित्सा को प्रोत्साहित करता है।
3. नीम में विटामिन और फैटी एसिड त्वचा की लोच में सुधार करते हैं और झुर्रियों और महीन रेखाओं को कम करते हैं।
4. नीम के पत्तों का उपयोग खुजली, एक्जिमा, रिंग कीड़े और कुछ हल्के त्वचा रोगों के लिए भी किया जाता हैं।
5. नीम डायबिटीज में बेहद फायदेमंद होता है। यह कई तरह कैसर को भी खत्म करने की क्षमता रखता हैं।
6. नीम की पत्तियां उबालकर उस पानी से बाल धोने से डैंड्रफ दूर होता है। नीम का दातून मसूड़ों के लिए बेहद फायदेमंद होता हैं। दांतों में कीड़े नहीं लगते।
4.
पीपल
फाइकस रेलीजियोसा
30 मीटर
पीपल के पेड़ का बहुत महत्व हैं। इसे न केवल धर्म संसार से जोड़ा गया है, बल्कि वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार भी पीपल का पेड़ कई तरह से फायदेमंद माना गया है। इसे अक्षय वृक्ष भी कहा जाता हैं। पीपल कभी भी पत्ताविहीन नहीं होता। इससे पत्ते-झड़ते जाते है और नए आते रहते हैं।
1. सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या में पीपल का पेड़ बहुत फायदेमंद होता है। दमा के रोगियों के लिए यह आयु बढ़ाने वाला होता है।
2. पीपल के पत्तों का प्रयोग कब्ज या गैस की समस्या में दवा के तौर पर किया जाता है। इसे पित नाशक भी माना जाता है।
3. त्वचा पर होने वाली समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली में पीपल के पत्तों को खाने या इसका काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।
4. पीपल के पकके हुए फलों को खुखाकर बनाए गए चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से हकलाने की समस्या से निजात में मदद होती हैं।
5.शरीर के किसी हिस्से में घाव हो जाने पर पीपल के पत्तों का गर्म लेप लगाने से घाव सूखने में मदद मिलती है।
6. पीपल एंटीऑक्सीडेट से भरपूर होता है, इसके पत्तों को नियमित रूप से चबाने पर तनाव में कमी होती हैं।
7. नकसीर फूटने की समस्या होने पर पीपल के ताजे पत्तों को तोड़कर उसका रस निकालकर नाक में डालने से बहुत फायदा होता हैं।
 
 
                                स्त्रोतः दैनिक जागरण(देहरादून) , 01 जुलाई 2020
 
 
 
अनार और आम
क्र. सं.
हिन्दी नाम
वैज्ञानिक नाम
औसत लम्बाई
पौधे का वर्णन
औषधि विवरण एवं विशेषताएं
5.
अनार
प्यूनिका ग्रानेटम
25-30 फीट
अनार को बेहद चमत्कारिक फल बताया गया है। केवल अनार फल ही नहीं बल्कि पूरा वृक्ष ही औषधीय गुणों से भरपूर होता है। अनार के सेवन से एक साथ कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, फोलिक एसिड और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं।
1. अनार खाने या रोजाना एक गिलास जूस पीने से कमर की चर्बी को कम किया जा सकता है। साथ ही इसका सेवन वजन कम करता हैं।
2. अनार में ऐसे गुण है जो शरीर में कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकते हैं।
3. अनार खाने या इसका जूस पीने से रक्तस्त्राव ठीक रहता है, जिससे दिल के रोगों का खतरा कम होता है। अनार के रस का प्रतिदिन सेवन करने से मांसपेसियों, हड्डियों और जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।
इसमें विटामिन, मिनरल और फोलिक एसिड पाया जाता है जो कि गर्भ में पल रहे शिशु और मां के लिए फायदेमंद है।
4. अनार खाने से शरीर में कोलस्ट्रॉल का लेवल नहीं बढ़ता। साथ ही इसका सेवन धमनियों में बलॉकेज की समस्या को दूर करता हैं।
 
6.
आम
मैंगीफेरा इंडिका
30-90 फीट
फलों का राजा आम स्वाद के साथ सेहत के मामले में भी धनी है। आकार के साथ प्रकारों में भी यह बाकी फलों की तुलना में अग्रणी हैं. इतना ही नहीं, आम के पत्ते पूजा और सजावट दोनों में प्रयोग होते हैं। स्वाद में कोई मुकाबला नहीं। वही इनमें कई औषधीय तत्व छिपे होते हैं।
1. आम जब थोड़ा कच्चा रहता है तो उसमें विटामिन-सी की मात्रा ज्यादा होती हैं।
2. आम में प्रचुर मात्रा में न्यूट्रासिटिकल होता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
3. इसमें लैक्सेटिव यानी पेट को साफ करने का गुण होता है। कब्ज की समस्या में लाभकारी है।
4. आम का सेवन आंखों को स्वस्थ रख सकता है क्योंकि इसमें विटामिन-ए होता है।
5. आम में मौजूद बायोएक्टिव घटक दिमाग को स्वस्थ रखता हैं।
6. गर्मी के दिनों में यह न सिर्फ शरीर को ताजगी देता है बल्कि हाइड्रेट भी करता है।
7. आम में विटामिन-बी 6 होता है। गुर्दे की पथरी से बचाव के लिए इसका सेवन लाभकारी होता हैं।
8. आम में हेपटोप्रोटेक्टिव गुण होते है, जिस कारण यह लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
                                स्त्रोतः दैनिक जागरण(देहरादून) , 03 जुलाई 2020
 
 
गूलर और इमली
क्र. सं.
हिन्दी नाम
वैज्ञानिक नाम
औसत लम्बाई
पौधे का वर्णन
औषधि विवरण एवं विशेषताएं
7.
गूलर
फाइकस रेसमोसा
10-15 मीटर
गूलर का कच्चा और पका दोनों तरह का फल उपयोगी है। यह बहुगुणीय है। गूलर के वृक्ष के सभी भाग जैसे पत्ते, फल, छाल, जड़ और लकड़ी सभी का कुछ न कुछ औषधीय प्रयोजन के लिए उपयोग किया जाता है।
1. गूलर में विटामिन बी 2 होता है जो रेड बल्ड सेल्स बनाने में मदद करता है। इसके अलावा यह एंटीबॉडीज बनाने में उपयोगी होता है।
2. गूलर में पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है। इसके सेवन से शरीर में आयरन की कमी नियंत्रित होती है।
3. गूलर में एंटी-डायबिटिक, एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटी-अस्थमैटिक प्रॉपटींज होती हैं, जिनकी वजह से यह डायबिटीज से लेकर अस्थमा इत्यादि में कारगर हैं।
4. नींद न आने की समस्या से निपटने में भी गूलर कारगर है। इसकी वजह है इसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन होता हैं।
5. पित्त की बीमारी में गूलर की पत्तियों को शहद के साथ पीसकर खाने से राहत मिलती है।
8.
इमली
टैमेरिन्डस इंडिका
30 मीटर
एक ऐसा फल जो मीठा और खट्टा दोनों के शौकीनों को पसंद हो सकता है। हरी होती है तो स्वाद में खट्टी लगती है और पकने के बाद लाल रंग लेती है और मीठी हो जाती है। जैसे इसके स्वाद बहुत है वैसे ही इसके फायदे भी अनेक हैं।
1. इमली के बीज में ट्रिपसिन इन्हिबिटर गुण (प्रोटीन को बढ़ाना और नियंत्रित करना) पाया जाता है। इससे हृदय रोग, हाई ब्लड शुगर, हाई-कोलस्ट्रॉल और मोटापा संबंधी समस्याएं नियंत्रित की जा सकती है।
2. इसमें कुछ ऐसे पोषक तत्व पाए जाते है जो पाचन में सहायक डाइजेस्टिव जूस को प्रेरित करने का काम करते हैं। इस कारण पाचन क्रिया बेहतर तरीके से काम करने लगती हैं।
3. इमली में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह तंत्रिका तंत्र को सही गति देने का काम करता है।
4. इसमें कुछ ऐसे पोषक तत्व पाए जाते है जिनमें एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने) और एंटी-स्ट्रेस (मानसिक तनाव कम करने) प्रभाव पाए जाते हैं।
5. इमली में एंटीऑक्सिडेंट और हेप्टोप्रोटेक्टिव प्रभाव पाए जाते हैं। पीलिया और लिवर के लिए फायदेमंद हैं।
6. इसमें एंटी-मलेरिया के साथ-साथ फेब्रिफ्यूज और लैक्सेटिव प्रभाव भी पाए जाते हैं। इसका उपयोग मलेरिया और माइक्रोबियल डिजीज से छुटकारा दिलाने में सहायक होता हैं।
7. इमली का उपयोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा दिलाने में लाभकारी साबित हो सकता हैं।
8. इमली में मौलिक, टार्टरिक और पोटैशियम एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पेट के लिए काफी उपयोगी हैं।
9. इमली खाने के फायदे में त्वचा से डेड स्किन निकालना और उसे निखारना भी शामिल हैं।
                                स्त्रोतः दैनिक जागरण(देहरादून) , 05 जुलाई 2020
 
 
कैथा और जामुन
क्र. सं.
हिन्दी नाम
वैज्ञानिक नाम
औसत लम्बाई
पौधे का वर्णन
औषधि विवरण एवं विशेषताएं
9.
कैथा
फिरोनिया लिमोनिया
30 फीट
कैथा विटामिन बी-12 का अच्छा स्त्रोत है। इसके द्वारा तरह-तरह के खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं जैसे जैम, जैली, शर्बत, चॉकलेट और चटनी आदि। ब्लड प्रेशर के साथ कोलस्ट्रॉल के लिए यह फल बहुत फायदेमंद होता हैं।
1. पके हुए इस फल का शरबत शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होता हैं।
2. इसके पाउडर को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।
3. यह फल कोलस्ट्रॉल तथा ब्लड प्रेशर को नियंत्रण करता हैं।
4. कच्चे फल में पके फल की अपेक्षा विटामिन सी और अन्य फ्रुट एसिड की अधिक मात्रा होती हैं।
5. बीज में प्रोटीन ज्यादा मात्रा में होता है। इसमें सभी आवश्यक लवण पाए जाते हैं तो गूदे (पल्प) में कार्बोहाइड्रेंट और फाइबर होता है। इसमें विटामिन बी1 और बी2 भी होता हैं।
10.
जामुन
सिजिगियम क्यूमिनी
30 मीटर
जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। यह मौसमी पल खाने में स्वादिष्ट होने के साथ कई औषधीय गुण भी लिए हुए हैं। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता हैं.
1. पाचन क्रिया के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है। जामुन खाने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
2. मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन एक रामबाण उपाय है। जामुन के बीजों का पाउडर मधुमेह में काफी फायदेमंद होता हैं।
3. इसके बीज को बारीक पीसकर पानी या दही के साथ लेने से पथरी की रोकथाम में भी जामुन खाना फायदेमंद होता है।
4. दांत और मसूड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में जामुन विशेष तौर पर फायदेमंद होता हैं।
5. गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।
6. जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती हैं।
                                स्त्रोतः दैनिक जागरण(देहरादून) , 06 जुलाई 2020
 
शहतूत और महुआ
क्र. सं.
हिन्दी नाम
वैज्ञानिक नाम
औसत लम्बाई
पौधे का वर्णन
औषधि विवरण एवं विशेषताएं
11.
शहतूत
मोरस अल्बा
10-20 मीटर
शहतूत स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है। त्वचा संबंधी रोगों में यह काफी लाभ पहुंचाता है। वही रक्त संचार को सुचारू करने में भी अहम भूमिका निभाता है। खास बात यह है कि शहतूत के साथ उसकी पत्तियों का भी कई तरह के रोगों में प्रयोग होता हैं।
1. शहतूत में सायनायडिंग 3 –ग्लूकोसाइड नाम का फाइटोन्यूट्रिएंट पाया जाता है। यह खून को साफ करता है। साथ ही रक्त संचार में भी सुधार करता हैं।
2. इसमें साइटोप्रोटेक्टिव (कोशिकाओं का नुकसान से बचाने वाला) और न्यूरोप्रोटेक्टिव (तंत्रिका तंत्र से संबंधी समस्याओं को दूर करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभभकारी हैं।
3. शहतूत में हाइपरग्लाइसेमिक प्रभाव पाया जाता है जो शरीर में इंसुलिन तकी सक्रियता को बढ़ाता है और खून में शुगर की अधिक मात्रा को कम करने में सहायक हैं।
4. शहतूत में एंटी-हीमोलिटिक (हीमोग्लोबिन के स्तर को बढाने वाला) प्रभाव पाया जाता है जो एनीमिया के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सक्षम हैं।
5. इसमें जिंक और मैगनीज अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें जिंक मुख्य तौर पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मदद करता हैं।
6. सफेद शहतूत में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
7. शहतूत में अधिक मात्रा में डाइटरी फाइबर और लिनोलेइक एसिड मौजूद होता है। यह कोलस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता हैं।
8. शहतूत में पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनॉयड पाए जाते है। कैंसर के जोखिमों को कम करने में मददगार है।
9. शहतूत में विटामिन-ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ-साथ उन पर आने वाले तनाव को दूर करता हैं।
12.
महुआ
मधुका लोंगफोलिआ
12-15 मीटर
महुआ जितना खाने में स्वादिष्ट और सुगंधित होता है उससे कहीं ज्यादा यह लाभकारी होता हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और इसके पत्ते से लेकर बीज गुणकारी होता हैं। विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर महुआ का प्रयोग आयुर्वेद में बहुत सी बीमारियों से छुटकारा पाने में किया जाता हैं। शुरूआत से ही इसे कई बीमारियों का एक इलाज कहा जाता हैं।
1. महुआ की छाल के रस का इस्तेमाल बुखार और फ्लू से निजात पाने में काफी असरदार साबित हो सकता हैं।
2. इसके फूलों का रस त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बेहद लाभकारी हैं।
3. महुआ की छाल खून में ग्लूकोज की मात्रा को कम करने का काम करती हैं। बल्ड शुगर नियंत्रित करती हैं।
4. इसके बीजों में कोलस्ट्रॉल कम करने के गुण पाए जाते हैं। इससे दिल की बीमारियों से फाफी हद तक बचा जा सकता हैं।
5. गठिया के दर्द को दूर करने के लिए इस पेड़ की छालों को पीसकर लगाने से राहत मिल सकती है।
6. महुआ का तेल सिरदर्द की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सबसे आसान और कारगर उपाय है।
7. नई माओं को महुआ के फूलों का सेवन कराना काफी लाभदायक साबित हो सकता हैं।
8. ये शरीर से हीमोग्लोबिन कमी को दूर करने में भी बेहद लाभकारी हैं।
9. हाई ब्लड प्रेशर, आंखों में जलन, दांत दर्द और मिर्गीं आदि में भी इसका प्रयोग काफी फायदेमंद साबित हो सकता हैं।
                                स्त्रोतः दैनिक जागरण(देहरादून), 04 और 07 जुलाई 2020
 
 
पौधों की उपयोगिता
 
                   औद्योगिक क्रांति से पहले दुनिया के सभी देश अपनी अधिकांश जरूरतें जंगल से ही पूरी करते थे। भारत की जीडीपी में वनों का 0.9 फीसद योगदान है। इनमें ईंधन के लिए   सालाना 12.8 करोड़ टन लकड़ी प्राप्त होती है। हर साल 4.1 करोड़ टन टिंबर मिलता है। महुआ, शहद, चंदन, मशरूम, तेल, औषधीय पौधे प्राप्त होते हैं।
 
 
1.        स्वस्थ बनाते हैः खुद को कीटों से बचाने के लिए पेड़-पौधे फाइटोनसाइड रसायन हवा में छोड़ते हैं। इसमें एंटी बैक्टीरियल खूबी होती है। सांस के जरिए जब ये रसायन हमारे शरीर में जाता है तो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती हैं।
 
2.        मिट्टी का कटाव रोकते हैः आठ करोड़ हेक्टेयर भूमि हवा और पानी के चलते मिट्टी के कटाव से गुजर रही हैं। 50 फीसद भूमि कोइसके चलते गंभीर नुकसान हो रहा है। भूमि की उत्पादकता घट रही हैं। इस भूमि को पेड़-पौधों के जरिए ही बचाया जा सकता है।
 
3.        प्रदूषण से बचावः वातावरण से कार्बन डाईऑक्साइड सोख ऑक्सीजन देते हैं। एक एकड़ में लगे पेड़ उतनी कार्बन सोखने में सक्षम हैं जितना एक कार 26,000 मील चलने में उत्सार्जित करती हैं। साथ ही वे वातावरण में मौजूद हानिकारक गैसों को भी कैद कर लेते हैं।
 
4.        हानिकारक किरणों से बचावः पेड़ पौधे धूप की अल्ट्रा वायलेट किरणों के असर को 50 फीसद तक कम कर देते हैं। ये किरणें त्वचा के कैंसर के लिए जिम्मेदार होती है। ऐसे में घर के आसपास, बगीचे और स्कूलों में पेड़ लगाने से बच्चे धूप की हानिकारक किरणों से सुरक्षित रहते हैं।
 
5. बिजली की बचतः यदि किसी घर के आसपास पौधे लगाए जाएं तो ये गर्मियों के दौरान उस घर की एयर कंडीशनिग जरूरत को 50 फीसद तक कम कर देते हैं। घर के आस   पास पेड़ पौधे लगाने से बगीचे से वाष्पीकरण बहुत कम होता है। नमी भी बरकरार रहती हैं।
 
6. ऑक्सीजन के लिएः एक सामान्य पेड़ साल भर में 12 किग्रा कार्बन डाईऑक्साइड को सोख लेता है। यही पेड़ साल भर में चार व्यक्तियों को जितनी ऑक्सीजन की जरूरत   होती है, उतनी मात्रा में प्राणवायु उन्मुक्त करता हैं।
 
7. भोजन के लिएः पौधों की तीन हजार प्रजातियों का इंसान खाद्य के रूप में इस्तेमाल करता है। दुनिया का 90 फीसद खाद्य पदार्थ पौधों की केवल 20 प्रजातियों से तैयार होता    है।
 
8. औषधि के लिएः दुनिया में उपयोग की जाने वाली 80 फीसद दवाएं पौधों से हासिल की जाती है। कुल पादप प्रजातियों में से केवल दो फीसद में ही औषधीय क्षमता का परीक्षण किया जा सका हैं। सभी प्रजातियों में इस क्षमता का परीक्षण किए जाने पर स्थिति कुछ और ही होगी।
 
 
                स्त्रोतः दैनिक जागरण (देहरादून) , 06 जुलाई 2020